प्रत्यावर्ती धारा परिपथ क्या है | alternating current circuit in Hindi

प्रत्यावर्ती धारा परिपथ

प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रत्यावर्ती वोल्टेज तथा प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति समान होती है परंतु यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्यावर्ती वोल्टेज तथा प्रत्यावर्ती धारा एक ही कला में हों। प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रत्यावर्ती वोल्टेज तथा प्रत्यावर्ती धारा के बीच कलांतर का मान परिपथ की प्रकृति पर निर्भर करता है।

प्रत्यावर्ती धारा परिपथ के प्रकार

1. प्रतिरोध पर प्रयुक्त ac वोल्टता
2. प्रेरकत्व पर प्रयुक्त ac वोल्टता
3. संधारित्र पर प्रयुक्त ac वोल्टता

1. प्रतिरोध पर प्रयुक्त ac वोल्टता

जब प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में केवल प्रतिरोध R होता है। तब प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रत्यावर्ती वोल्टता तथा प्रत्यावर्ती धारा दोनों समान कला में होते हैं।

प्रत्यावर्ती धारा परिपथ

तब इनके प्रत्यावर्ती धारा तथा प्रत्यावर्ती वोल्टता के समीकरण निम्न प्रकार प्राप्त होते हैं।
प्रत्यावर्ती वोल्टता V = Vmsinωt
प्रत्यावर्ती धारा i = imsinωt
अर्थात प्रत्यावर्ती वोल्टता तथा प्रत्यावर्ती धारा दोनों साथ-साथ न्यूनतम तथा अधिकतम मान प्राप्त करेंगी। इससे स्पष्ट होता है कि वोल्टता एवं धारा एक दूसरे के साथ समान कला में हैं।
जहां ω कोणीय आवृत्ति है।

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ओम के नियम से
V = iR
तो V = Vmsinωt में का V मान रखने पर
या iR = Vmsinωt
अब उपरोक्त समीकरण में i = imsinωt से i का मान रखने पर
\footnotesize \boxed { V_m = i_m R }

यही समीकरण ओम का नियम है।
प्रतिरोध प्रत्यावर्ती धारा (AC) तथा दिष्ट धारा (DC) दोनों प्रकार की वोल्टताओं के लिए समान रूप से लागू होता है। अर्थात प्रतिरोध ac और dc दोनों में समान रूप से कार्य करता है।

2. प्रेरकत्व पर प्रयुक्त ac वोल्टता

जब प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में केवल प्रेरकत्व L होता है। तब परिपथ में प्रत्यावर्ती वोल्टता, प्रत्यावर्ती धारा से π/2 आगे रहती है। अथवा इसे इस प्रकार भी लिख सकते हैं कि प्रत्यावर्ती धारा, प्रत्यावर्ती वोल्टता से 90° पीछे है।

प्रेरकत्व पर प्रयुक्त ac वोल्टता

तब इनके प्रत्यावर्ती धारा तथा प्रत्यावर्ती वोल्टता के समीकरण निम्न प्रकार प्राप्त होते हैं।
प्रत्यावर्ती वोल्टता V = Vmsin(ωt + π/2)
प्रत्यावर्ती धारा i = imsinωt
अथवा इन समीकरणों को इस प्रकार भी लिखा जा सकता है।
V = Vmsinωt
i = imsin(ωt – π/2)

दोनों समीकरणों की तुलना करने पर
im = \large \frac{V_m}{ωL}
जहां im प्रत्यावर्ती धारा का शिखर (महत्तम) मान है। चूंकि ωL राशि प्रतिरोध के सदृश है। इसे प्रेरण प्रतिघात कहते हैं। एवं इसे XL द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। तब
XL = ωL
प्रेरण प्रतिघात का मात्रक ओम होता है। जो कि प्रतिरोध का मात्रक है। एवं इसकी विमा भी वही होती हैं जो प्रतिरोध की विमा है।
जहां ω कोणीय वेग है। इसका मान 2πf होता है तो
\footnotesize \boxed { X_L = 2πfL }

प्रेरकत्व का उपयोग केवल प्रत्यावर्ती धारा में ही किया जाता है। दिष्ट धारा में इसका उपयोग नहीं किया जाता है। क्योंकि दिष्ट धारा की आवृत्ति शून्य होती है जिस कारण दिष्ट धारा में प्रेरकत्व का प्रयोग करने के पश्चात परिपथ की आवृत्ति का मान शून्य हो जाता है।
दिष्ट धारा DC के लिए आवृत्ति f = 0 तब
XL = 0

3. संधारित्र पर प्रयुक्त ac वोल्टता

जब प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में केवल संधारित्र C होता है। तब परिपथ में प्रत्यावर्ती वोल्टता, प्रत्यावर्ती धारा से π/2 पीछे रहती है। अथवा इस प्रकार भी लिख सकते हैं कि प्रत्यावर्ती धारा, प्रत्यावर्ती वोल्टता से 90° आगे है।

संधारित्र पर प्रयुक्त ac वोल्टता

तब इनके प्रत्यावर्ती धारा तथा प्रत्यावर्ती वोल्टता के समीकरण निम्न प्रकार प्राप्त होते हैं।
प्रत्यावर्ती वोल्टता V = Vmsinωt
प्रत्यावर्ती धारा i = imsin(ωt + π/2)
अथवा इन समीकरणों को इस प्रकार भी लिखा जा सकता है।
V = Vmsin(ωt – π/2)
i = imsinωt

दोनों समीकरणों की तुलना करने पर
im = \large \frac{V_m}{1/ωC}
जहां im प्रत्यावर्ती धारा का शिखर मान है। चूंकि 1/ωC की भूमिका प्रतिरोध के समान ही है। इसलिए इसे संधारित्र प्रतिघात कहते हैं। और इसे XC द्वारा दर्शाया जाता है। तब
XC = 1/ωC
संधारित्र प्रतिघात का मात्रक भी ओम होता है। एवं इसकी विमा भी वही होती हैं जो प्रतिरोध की विमा है।
जहां ω कोणीय वेग है। इसका मान 2πf होता है तो
\footnotesize \boxed { X_C = \frac{1}{2πfC} }

संधारित्र का प्रयोग केवल प्रत्यावर्ती धारा में ही किया जाता है। संधारित्र का प्रयोग दिष्ट धारा में नहीं होता है। क्योंकि दिष्ट धारा की आवृत्ति शून्य होती है। एवं परिपथ में संधारित्र लगाने पर आवृत्ति का मान अनन्त हो जाता है। जिस कारण परिपथ खराब हो सकता है। अर्थात
दिष्ट धारा DC के लिए आवृत्ति f = 0 तब
XC = \large \frac{1}{2πfC}
या \footnotesize \boxed { X_C = ∞ }


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