क्वथनांक का उन्नयन क्या है, सूत्र, संबंध | elevation of boiling point in Hindi

क्वथनांक का उन्नयन

किसी द्रव का क्वथनांक वह ताप होता है जिस पर द्रव का वाष्पदाब उसके वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है। द्रव का ताप बढ़ने पर वाष्प दाब बढ़ता है।
हम जानते हैं कि किसी अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन का वाष्पदाब कम होता है। अतः विलयन का वाष्प दाब को वायुमंडलीय दाब के बराबर लाने के लिए अधिक ऊष्मा (ताप) की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि विलयन का क्वथनांक, शुद्ध विलायक के क्वथनांक से अधिक हो जाता है।

किसी शुद्ध विलायक में कोई अवाष्पशील विलेय पदार्थ को मिलाने पर विलायक के क्वथनांक में उत्पन्न वृद्धि को क्वथनांक का उन्नयन (elevation of boiling point in Hindi) कहते हैं। क्वथनांक का उन्नयन एक अणुसंख्यक गुणधर्म है। क्वथनांक का उन्नयन को ∆Tb द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
यदि शुद्ध विलायक का क्वथनांक T°b तथा विलयन का क्वथनांक Tb हो तो
क्वथनांक का उन्नयन (∆Tb) = Tb – T°b

क्वथनांक के उन्नयन का सूत्र

क्वथनांक का उन्नयन (∆Tb) = Tb – T°b
किसी तनु विलयन में क्वथनांक का उन्नयन, विलयन में उपस्थित विलेय की मोलल सांद्रता के समानुपाती होता है। तब
∆Tb ∝ M
∆Tb = KbM
जहां Kb को क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक या मोलल उन्नयन स्थिरांक कहते हैं। तथा M मोललता है। यही क्वथनांक उन्नयन और विलेय के मोलल सांद्रता में संबंध है।

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मोललता M = \large \frac{w\,×\,1000}{W\,×\,m} होता है तब क्वथनांक का उन्नयन
∆Tb = Kb × \large \frac{w\,×\,1000}{W\,×\,m}
\footnotesize \boxed { ∆T_b = \frac{1000 × K_b × w}{m × W} }
जहां →
w = विलेय का भार (मात्रा)
m = विलेय का अणुभार (मोलर द्रव्यमान)
W = विलायक का भार
Kb = मोलल उन्नयन स्थिरांक
∆Tb = क्वथनांक का उन्नयन

Note → विलेय के अणुभार को एनसीईआरटी बुक में विलेय के मोलर द्रव्यमान से के नाम से प्रयुक्त किया है। इसलिए आप इन दोनों में भ्रमित न होना।


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