हेनरी का नियम के अनुप्रयोग एवं सीमाएं, सूत्र | Henry ka niyam class 12

हेनरी द्वारा प्रस्तुत यह नियम किसी द्रव में गैस की विलेयता पर दाब के प्रभाव को व्यक्त करता है। आइये इस नियम की विस्तार से चर्चा करते हैं।

हेनरी का नियम

हेनरी नियम (Henry’s law in Hindi) के अनुसार, स्थिर ताप पर किसी गैस की द्रव में विलेयता द्रव अथवा विलयन की सतह पर गैस द्वारा लगाए गए दाब के समानुपाती होती है।
यदि किसी निश्चित ताप तथा साम्य दाब p पर किसी द्रव में m ग्राम गैस विलीन हो तो हेनरी नियम के अनुसार
m ∝ p
m = KHP
जहां KH एक स्थिरांक है। जिसे हेनरी स्थिरांक कहते हैं। समान ताप पर विभिन्न गैसों के लिए हेनरी स्थिरांक का मान भिन्न-भिन्न होता है। हेनरी स्थिरांक का मान गैस की प्रकृति पर निर्भर करता है। जिस गैस का हेनरी स्थिरांक का मान जितना अधिक होगा द्रव में उस गैस के विलेयता उतनी ही कम होगी।

Note – जब विलायक के संपर्क में एक से अधिक गैसें एक साथ आती हैं। तो प्रत्येक गैस के घुलने की मात्रा उसके आंशिक दाब के समानुपाती होती है।

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जल में कुछ गैसों के लिए हेनरी स्थिरांक का मान

गैसताप (K में)KH (kbar में)
He293144.97
H229369.16
N229376.48
O229334.86
आर्गन29840.3
CO22981.67
मेथेन2980.413
वाइनिल क्लोराइड2980.611

हेनरी के नियम की सीमाएं

  • हेनरी का नियम केवल तनु विलयनों के लिए ही मान्य है।
  • विलयन का दाब बहुत अधिक नहीं होना चाहिए।
  • विलयन का ताप बहुत काम नहीं होना चाहिए।
  • गैस की विलेयता बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • गैसों का विलायक में संगुणन और वियोजन नहीं होना चाहिए।

हेनरी के नियम के अनुप्रयोग

  1. सोडा जल तथा शीतल पेय पदार्थों में कार्बन डाइऑक्साइड की विलेयता में वृद्धि के लिए इनको बोतल में अधिक दाब पर बन्द किया जाता है।
  1. अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर ऑक्सीजन का आंशिक दाब समतल स्थानों की अपेक्षा कम होता है। अतः इन स्थानों पर आवास करने वाले व्यक्तियों तथा आरोहकों के रक्त और ऊतक में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। जिस कारण इनका शरीर कमजोर हो जाता है। तथा यह स्पष्टता सोच नहीं पाते हैं। इन लक्षणों को एनोक्सिया कहते हैं।
  1. जब गोताखोर गहरे समुद्र की ओर जाते हैं। तब इन गोताखोरों को अधिक दाब पर गैसों की अधिक घुलनशीलता का सामना करना पड़ता है। अधिक बाहरी दाब के कारण श्वास के साथ ली गई वायुमंडलीय गैसों की रक्त में विलेयता बढ़ जाती है। बाहरी सतह की ओर आने पर गोताखोरों पर लगने वाला बाहरी दाब धीरे-धीरे कम होने लगता है। जिसके कारण घुली हुई गैसों के बाहर निकलने पर रक्त में नाइट्रोजन के बुलबुल बन जाते हैं। यह कोशिकाओं में बाधा उत्पन्न कर देता है। और एक चिकित्सीय अवस्था उत्पन्न कर देती है। जिसे बेंट्स कहते हैं। इस जहरीले प्रभाव से बचने के लिए गोताखोरों द्वारा श्वास लेने वाले टैंकों में हीलियम गैस को मिलाया जाता है।

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