हिंदी स्वर – परिभाषा, भेद, ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत स्वर कितने होते हैं

स्वर

स्वर स्वतंत्र रूप से बोले जाने वाले वर्ण होते हैं। इनका उच्चारण करते समय अन्य किसी वर्ण की सहायता नहीं लेनी पड़ती है। इनकी संख्या 13 मानी गई है, किंतु उच्चारण के आधार पर इनकी संख्या 10 है- अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।

Note → हिंदी भाषा में मूल रूप से स्वरों की संख्या 11 होती है। अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

स्वर के भेद कितने होते हैं

स्वरों का वर्गीकरण

स्वरों को निम्न प्रकार में बांटा गया है।

1. मात्रा या उच्चारण काल के आधार पर

मात्रा या उच्चारण काल के आधार पर स्वर तीन प्रकार के होते हैं।
(i) ह्रस्व स्वर
(ii) दीर्घ स्वर
(iii) प्लुत स्वर

(i) ह्रस्व स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में कम समय (एक मात्रा का समय) लगता है ह्रस्व स्वर कहलाते हैं।

(ii) दीर्घ स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में अधिक समय (दो मात्रा का समय) लगता है वह दीर्घ स्वर कहलाते हैं। यह दो स्वरों से मिलकर बने होते हैं, इसलिए इन्हें संयुक्त स्वर भी कहते हैं। इनकी संख्या 7 है।
आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

संयुक्त स्वर भी दो प्रकार के होते हैं
• सजातीय स्वर – वे दीर्घ स्वर जिनका निर्माण एक ही स्थान से बोले जाने वाले स्वरों के मेल से होता है। उन्हें सजातीय स्वर कहते हैं।
जैसे – आ(अ+अ), ई(इ+इ), ऊ(उ+उ)
• विजातीय स्वर – वे दीर्घ स्वर जिनका निर्माण विभिन्न स्थानों से बोले जाने वाले स्वरों के मेल से होता है। उन्हें विजातीय स्वर कहते हैं।
जैसे – ए (अ+इ), ऐ (अ+ए), ओ (अ+उ), ओ (अ+ओ)

(iii) प्लुत स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में दीर्घ स्वर से भी अधिक समय लगता है, उन्हें प्लुत स्वर कहते हैं।
जैसे – राऽऽऽऽऽऽम, ओऽऽऽऽऽम आदि।
इन स्वरों का उपयोग किसी को पुकारने में या नाटकों के संवादों में किया जाता है।

2. जीभ के प्रयोग के आधार पर

जीभ के प्रयोग के आधार पर स्वर तीन प्रकार के होते हैं।

अग्र स्वर

इन स्वरों का उच्चारण जीभ के अग्र भाग से होता है।
जैसे – इ, ई, ए, ऐ

मध्य स्वर

इन स्वरों का उच्चारण जीभ के मध्य भाग से होता है।
जैसे –

पश्च स्वर

इन स्वरों का उच्चारण जीभ के पश्च (पिछले भाग से) होता है।
जैसे – आ, उ, ऊ, ओ, औ, ऑ

3. मुख विवर (मुख द्वार) खुलने के आधार पर

मुख द्वार खुलने के आधार पर स्वर 4 प्रकार के होते हैं।

संवृत

इन स्वरों के उच्चारण में मुख द्वार लगभग बंद सा रहता है।
जैसे – इ, ई, उ, ऊ

अर्धसंवृत

इन स्वरों के उच्चारण में मुख द्वार आधा बंद रहता है।
जैसे – ए, ओ

विवृत

इन स्वरों के उच्चारण में मुख द्वार पूरा खुलता है।
जैसे –

अर्धविवृत

इन स्वरों के उच्चारण में मुख द्वार आधा खुलता है।
जैसे – अ, ऐ, औ, ऑ

4. ओठों की स्थिति के आधार पर

ओठों की स्थिति के आधार पर स्वर दो प्रकार के होते हैं।

वृतमुखी स्वर → जिन स्वरों का उच्चारण करते समय ओंठ वृताकार (गोलाकार) होते हैं, उन्हें वृतमुखी स्वर कहते हैं।
जैसे – उ, ऊ, ओ, औ, ऑ

अवृतमुखी स्वर → जिन स्वरों का उच्चारण करते समय ओठ वृताकार (गोलाकार) नहीं होते हैं, उन्हें अवृतमुखी स्वर कहते हैं।
जैसे – अ, आ, इ, ई, ए, ऐ

5. हवा के नाक व मुंह से निकलने के आधार पर

इस आधार पर सवार दो प्रकार के होते हैं।
अनुनासिक स्वर → इनके उच्चारण में हवा मुंह के साथ-साथ नाक से भी निकलती है।
जैसे – अँ, आँ, इँ आदि।

निरनुनासिक स्वर → इनके उच्चारण में हवा केवल मुख से निकलती है।
जैसे – अ, आ, इ आदि।

6. घोषत्व के आधार पर

घोष का अर्थ होता है स्वतंत्र्यों में श्वास का कंपन होना। स्वरों के उच्चारण करने पर स्वतंत्र्यों में कंपन होता है।
इसके दो प्रकार होते हैं- सघोष तथा अघोष
सभी स्वर सघोष होते हैं।

7. प्राणत्व के आधार पर

यहां प्राण का अर्थ है- वायु (हवा)
इसके दो प्रकार हैं- अल्प्राण तथा महाप्राण
सभी स्वर अल्पप्राण हैं, क्योंकि सभी स्वरों के उच्चारण में मुख से हवा कम निकलती है।

हिंदी स्वर से संबंधित प्रश्न उत्तर

1. स्वर किसे कहते हैं?

स्वतंत्र रूप से बोले जाने वाले वर्णों को स्वर कहते हैं।

2. स्वर कितने होते हैं?

स्वरों की संख्या 13 मानी गई है लेकिन मूल रूप से इनकी संख्या 11 होती है।

3. 13 स्वर कौन से हैं?

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं तथा अ:


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