चल कुंडली धारामापी क्या है, संरचना, धारा तथा वोल्टेज सुग्राहिता, सिद्धांत, चित्र

चल कुंडली धारामापी

वह उपकरण जिससे किसी भी परिपथ में विद्युत धारा का संसूचन किया जा सकता है। इस प्रकार के उपकरण को चल कुंडली धारामापी (moving coil galvanometer in Hindi) कहते हैं। चल कुंडली धारामापी के क्रिया चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर आरोपित बल आघूर्ण पर आधारित होती है।

चल कुंडली धारामापी की संरचना

चल कुंडली धारामापी में दो शक्तिशाली चुंबकों N व S के ध्रुव खण्डों बीच में एल्यूमीनियम के फ्रेम के ऊपर तांबे के पतले तारों से लिपटी एक कुंडली रखी होती है। इस कुंडली से एक संकेतक लगा होता है। कुंडली के दोनों सिरों पर दो स्प्रिंग लगे होते हैं। जो कुंडली के घूमने पर ऐंठन बल युग्म उत्पन्न करते हैं। कुंडली के विक्षेप को पढ़ने के लिए इसमें एक संकेतक लगाया जाता है चित्र से स्पष्ट है।

चल कुंडली धारामापी
चल कुंडली धारामापी

जब कुंडली में i धारा प्रवाहित की जाती है। तो कुंडली के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र स्थापित हो जाता है। यह क्रोड अनेकों फेरों वाली एक कुंडली होती है। यदि कुंडली पर लगने वाला बल आघूर्ण τ है तो
τ = NiABsinθ
जहां θ कुंडली के तल पर लंब की दिशा तथा चुंबकीय क्षेत्र B की दिशा के बीच का कोण है।
तथा N कुंडली में फेरों की संख्या, i कुंडली में प्रवाहित विद्युत धारा, B चुंबकीय क्षेत्र तथा A कुंडली का क्षेत्रफल है।
चूंकि θ = 90° तो sin90° = 1 तब बल आघूर्ण
τ = NiAB

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यह बल आघूर्ण कुंडली में घूर्णन की प्रवृत्ति उत्पन्न करता है जिसके फलस्वरूप कुंडली अपने अक्ष पर घूर्णन करने लगती है। कुंडली से जुड़ी क्रोड में कुंडली के विरुद्ध बल आघूर्ण kΦ उत्पन्न हो जाता है। जो कुंडली के बल आघूर्ण NiAB को संतुलित करता है।

साम्यावस्था में
kΦ = NiAB
जहां k कुंडली का ऐंठन नियतांक है। तथा Φ गैल्वेनोमीटर में उत्पन्न विक्षेपण है। तो
Φ = \left( \frac{NAB}{k} \right)i
जहां \left( \frac{NAB}{k} \right) गैल्वेनोमीटर के लिए एक नियतांक है। तो
\footnotesize \boxed { i ∝ Φ }
अर्थात् इस प्रकार कुंडली में प्रवाहित धारा उसमें उत्पन्न विक्षेपण के अनुक्रमानुपाती होती है।

धारामापी की सुग्राहिता

चल कुंडली धारामापी में धारा तथा वोल्टेज दोनों प्रकार की सुग्रहिता होती है।

1. चल कुंडली धारामापी की धारा सुग्राहिता
कुंडली में उत्पन्न विक्षेप Φ तथा कुंडली में प्रवाहित विद्युत धारा i के अनुपात को धारा सुग्राहिता कहते हैं।
धारा सुग्राहिता = \large \frac{Φ}{i}
या धारा सुग्राहिता = \large \frac{NAB}{k}
अतः N, A तथा B के मान बढ़ाकर धारामापी की सुग्राहिता बढ़ाई जा सकती है। गैल्वेनोमीटर की सुग्राहिता में वृद्धि करने का सबसे सरल उपाय यह है कि कुंडली में फेरों की संख्या N में वृद्धि कर दें।

2. चल कुंडली धारामापी की वोल्टेज सुग्राहिता
कुंडली के सिरों के बीच वोल्टेज V तथा विक्षेप Φ के अनुपात को वोल्टेज सुग्राहिता कहते हैं।
वोल्टेज सुग्राहिता = \large \frac{Φ}{V}
या वोल्टेज सुग्राहिता = \left(\frac{NAB}{k}\right) \frac{1}{R}
अतः N, A तथा B के मान बढ़ाकर धारामापी की सुग्राहिता बढ़ाई जा सकती है। तथा R के मान को कम करके भी धारामापी की सुग्राहिता बढ़ाई जा सकती है।


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