नाभिक की संरचना, आकार, आकृति तथा नाभिकीय घनत्व क्या है

प्रस्तुत लेख के अंतर्गत हम नाभिक की संरचना और नाभिक का आकार एवं आकृति तथा नाभिकीय घनत्व के बारे में अध्ययन करेंगे और इसको आसानी से समझने के लिए उदाहरणों का भी प्रयोग करेंगे।

नाभिक की संरचना

रदरफोर्ड में ɑ-कण प्रकीर्णन के प्रयोग के अध्ययन द्वारा यह पता लगाया कि किसी परमाणु का समस्त धन आवेश परमाणु के केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म स्थान में संकेंद्रित रहता है। इस स्थान को परमाणु का नाभिक कहते हैं। नाभिक के चारों ओर अनेक निश्चित कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन घूमते रहते हैं। इलेक्ट्रॉन पर आवेश होता है। इन इलेक्ट्रॉनों का कुल ऋण आवेश नाभिक में उपस्थित कुल धन आवेश के बराबर होता है।

रदरफोर्ड द्वारा प्रोटॉन की खोज के पश्चात बताया गया कि नाभिक में प्रोटोन ही उपस्थित होते हैं जिन पर धन आवेश होता है। किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या, परमाणु के परमाणु क्रमांक के बराबर होती है।
इसके पश्चात न्यूट्रॉन की खोज हुई और यह माना गया कि परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉन और प्रोटॉन उपस्थित होते हैं। प्रोटोन पर धन आवेश होता है जबकि न्यूट्रॉन आवेशहीन होते हैं अर्थात न्यूट्रॉन पर आवेश नहीं होता है।

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नाभिक का आकार

नाभिक का आकार 10-15 मीटर की कोटि का होता है।
प्रयोग द्वारा यह ज्ञात किया गया, कि नाभिक का आयतन, उसमें उपस्थित न्यूक्लिऑनों की संख्या के अनुक्रमानुपाती होता है।
माना नाभिक की त्रिज्या R तथा न्यूक्लिऑनों की संख्या A है तो
[katex] \frac{4}{3} [/katex]πR3 ∝ A
चूंकि परमाणु का आकार गोलाकार होता है तो यहां पर गोले के आयतन का सूत्र प्रयोग किया गया है।
या R3 ∝ A
R ∝ A
तो [katex] \footnotesize \boxed { R = R_0 A^{⅓} } [/katex]
जहां R0 एक नियतांक है। इसका मान लगभग 1.2 × 10-15 मीटर होता है।
नाभिक की त्रिज्याओं को फर्मी F में व्यक्त किया जाता है।
1 फर्मी F = 10-15 मीटर
नाभिकों की त्रिज्याएं भी भिन्न-भिन्न परमाणुओं के लिए भिन्न-भिन्न होती हैं।

नाभिक की आकृति

नाभिक की आकृति प्रायः गोलाकार मानी जाती है। लेकिन यह इसकी आकृति गोलाकार से कुछ विचलित होता है। इसका विचलित लगभग 10% होता है।

नाभिकीय घनत्व

माना किसी एक न्यूक्लिऑन का द्रव्यमान m तथा न्यूक्लिऑन की संख्या A है तथा नाभिक की त्रिज्या R तो
नाभिक का कुल द्रव्यमान M = m × A समी.(1)
तथा नाभिक का आयतन V = [katex] \frac{4}{3} [/katex]πR3
नाभिक के आकार के सूत्र से त्रिज्या R का मान रखने पर
या V = [katex] \frac{4}{3} [/katex] π(R0A)3
V = [katex] \frac{4}{3} [/katex] πR03A समी.(2)
माना नाभिक का घनत्व ρ है तो
ρ = [katex] \frac{M}{V} [/katex]
समी.(1) व समी.(2) मान रखने पर नाभिक का घनत्व
ρ = [katex] \frac{mA}{\frac{4}{3}πR_0^3A} [/katex]
[katex] \footnotesize \boxed { ρ = \frac{3m}{4πR_0^3} } [/katex]
चूंकि नाभिक का घनत्व न्यूक्लिऑनों की संख्या A पर निर्भर नहीं करता है। अतः जिस कारण लगभग सभी परमाणु के नाभिकों के घनत्व समान होते हैं।


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