Champions Trophy, जिसे मिनी वर्ल्ड कप भी कहा जाता है, ICC के सबसे बड़ी टूर्नामेंटों में से एक है। भारतीय क्रिकेट टीम ने इस टूर्नामेंट में कई शानदार प्रदर्शन किए हैं और 2002 व 2013 में ट्रॉफी अपने नाम भी की थी। लेकिन भारतीय टीम कुछ मौकों पर Champions Trophy का खिताब जीतने से चूक भी गई। दो ऐसे मौके आए जब भारत ने फाइनल तक का सफर तो तय किया, लेकिन आखिरी बाधा पार नहीं कर पाया। Champions Trophy में भारतीय टीम का सफर हमेशा शानदार रहा है, लेकिन ये दो फाइनल मुकाबले ऐसे रहे, जहां टीम को कड़वा अनुभव मिला। जब दो तगड़ी टीम ने भारत को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की। अब 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी फिर से होने वाली है, और भारतीय टीम एक बार फिर इस ट्रॉफी को जीतने के इरादे से उतरेगी।
1) न्यूज़ीलैंड – 2000
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सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम ने साल 2000 की Champions Trophy (जिसे तब ICC KnockOut Trophy कहा जाता था) के फाइनल में जगह बनाई थी। इस मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 264/6 का स्कोर बनाया, जिसमें कप्तान गांगुली ने शानदार शतक (117 रन) जड़ा।
लेकिन न्यूज़ीलैंड के ऑलराउंडर क्रिस केयर्न्स ने भारत की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उन्होंने 113 गेंदों में नाबाद 102 रनों की पारी खेली और न्यूज़ीलैंड को चार विकेट से जीत दिलाकर पहली बार कोई ICC टूर्नामेंट जिताया। भारत की गेंदबाजी दबाव में आ गई और केयर्न्स ने आखिरी ओवरों में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर भारत से ट्रॉफी छीन ली। यह भारत के लिए एक बड़ी हार थी, क्योंकि टीम शानदार फॉर्म में थी और खिताब जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी।
2) पाकिस्तान – 2017
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2017 की Champions Trophy का फाइनल भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे निराशाजनक दिनों में से एक माना जाता है। विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन किया था और फाइनल में पाकिस्तान से भिड़ी।
लेकिन फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 180 रनों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी। पाकिस्तान के लिए फखर जमान ने 114 रनों की शानदार पारी खेली, जिससे पाकिस्तान ने 50 ओवर में 338/4 का विशाल स्कोर खड़ा किया। भारत के गेंदबाजों के पास फखर और अजहर अली (59 रन) की जोड़ी का कोई जवाब नहीं था।
जवाब में भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। मोहम्मद आमिर ने विराट कोहली, रोहित शर्मा और शिखर धवन जैसे बड़े विकेट लेकर भारत को बैकफुट पर धकेल दिया। पूरी भारतीय टीम सिर्फ 158 रनों पर ऑलआउट हो गई और पाकिस्तान ने पहली बार कोई Champions Trophy जीती। यह फाइनल भारतीय फैंस के लिए बेहद निराशाजनक था क्योंकि लीग स्टेज में भारत ने पाकिस्तान को आसानी से हराया था, लेकिन फाइनल में कहानी पूरी तरह बदल गई।
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